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BJP ने नवाब सिंह नागर को दी पश्चिमी यूपी की कमान, जानें उनका राजनीतिक सफर

2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी में भाजपा ने संगठन में बदलाव किया है। पूर्व मंत्री नवाब सिंह नागर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश का संगठनात्मक प्रभारी बनाकर नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।

Reported by India Headlines TV and edited by Tanvi Pandey

UP assembly election 2027: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन भाजपा ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी कड़ी में पार्टी ने प्रदेश संगठन में बदलाव करते हुए कई नेताओं को नई जिम्मेदारियां दी हैं। इनमें सबसे चर्चित नाम पूर्व सिंचाई मंत्री नवाब सिंह नागर का है। उन्हें पश्चिमी उत्तर प्रदेश का संगठनात्मक प्रभारी बनाया गया है।

क्यों अहम मानी जा रही नियुक्ति

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में गुर्जर समाज की अच्छी हिस्सेदारी मानी जाती है। नवाब सिंह नागर लंबे समय से इस इलाके की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा ने इसी अनुभव को देखते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी दी है।

दादरी से मिली पहचान

नवाब सिंह नागर ने 1993 में पहली बार दादरी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन जीत नहीं मिली। हार के बाद भी उन्होंने क्षेत्र में काम जारी रखा। तीन साल बाद, 1996 में, उन्होंने उसी सीट से जीत दर्ज की। वर्ष 2002 में दोबारा विधायक बने और भाजपा सरकार में सिंचाई मंत्री की जिम्मेदारी संभाली।

शुरुआत संघ से हुई

कॉलेज के समय से ही उनका जुड़ाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से रहा। भाजपा बनने के बाद वर्ष 1980 में उन्हें नोएडा का पहला मंडल अध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद उन्होंने संगठन के साथ-साथ स्थानीय मुद्दों पर भी लगातार काम किया।

किसान और स्थानीय मुद्दे उठाए

अपने राजनीतिक जीवन में नवाब सिंह नागर ने किसानों और स्थानीय लोगों से जुड़े कई मुद्दों पर आंदोलन किए। स्टांप शुल्क, भूमि आवंटन, जिला बहाली और किसानों के अधिकार जैसे विषयों को लेकर उन्होंने कई बार प्रदर्शन किए। इन आंदोलनों के दौरान उन्हें गिरफ्तार भी किया गया।

डीएनडी टोल के खिलाफ आंदोलन

वर्ष 2014 से 2016 के बीच उन्होंने डीएनडी फ्लाईवे पर टोल वसूली का विरोध किया। इस दौरान धरने हुए, कार रैली निकाली गई और लोगों को जोड़ने के लिए अभियान भी चलाया गया। बाद में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद डीएनडी टोल व्यवस्था में बदलाव हुआ।

संगठन में लगातार मिला भरोसा

भाजपा ने समय-समय पर उन्हें कई जिम्मेदारियां दीं। वर्ष 2013 में वे भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बने। इसके अलावा उत्तर प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी उन्होंने निभाई। पार्टी उन्हें लंबे समय से संगठन के अनुभवी नेताओं में गिनती है।

विवाद भी रहे चर्चा में

वर्ष 2015 में दादरी के बिसाहड़ा गांव में मोहम्मद अखलाक की हत्या के बाद दिए गए उनके बयान राजनीतिक विवाद का कारण बने थे। इसके अलावा 2017 में दादरी से टिकट नहीं मिलने पर उनके समर्थकों ने विरोध भी किया था।

अब चुनावी तैयारी पर नजर

भाजपा ने 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी दी है। माना जा रहा है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने की जिम्मेदारी अब उनके पास होगी।

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